Booking.com

राज्य

  1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. सियासतः यूपी में अजय राय के सहारे नैया पार लगाएगी कांग्रेस ! 24 में साख का सवाल

सियासतः यूपी में अजय राय के सहारे नैया पार लगाएगी कांग्रेस ! 24 में साख का सवाल

2024 की बिसात पर सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी चाल चलनी शुरू कर दी है। जहां बीजेपी उत्तरप्रदेश में अपने मास्टरप्लान को अंजाम देने में जुट गई है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी देर से ही सही पर एक्टिव होती नजर आई है।

By Rakesh 

Updated Date

लखनऊ। 2024 की बिसात पर सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी चाल चलनी शुरू कर दी है। जहां बीजेपी उत्तरप्रदेश में अपने मास्टरप्लान को अंजाम देने में जुट गई है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी देर से ही सही पर एक्टिव होती नजर आई है। उत्तरप्रदेश में कांग्रेस अपनी कोर कमेटी में बदलाव करती नजर आ रही है।

पढ़ें :- नेम प्लेट मामले पर SC के फैसले के बाद अखिलेश यादव का भाजपा पर तंज, ''BJP को दुख”

ऐसे में उत्तरप्रदेश में चाणक्य के तौर पर कांग्रेस ने अजय राय को चुना है। अजय राय के माध्यम से कांग्रेस 24 के चुनाव में अपनी साख बचाना चाहती है। अब कांग्रेस की साख बचेगी या जो बची-खुची है वो भी राख हो जाएगी। ये तो आने-वाला वक्त ही बताएगा।

2024 चुनाव को लेकर कांग्रेस के दांव पर देखिए India Voice की ये खास रिपोर्ट

ये लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए एक आम चुनाव की तरह नहीं होगा। 2024 कांग्रेस की दशा और दिशा दोनों ही तय करने वाला है। साख का सवाल है और ये चुनाव कांग्रेस की रिपोर्ट कार्ड को तैयार करेगा। अब सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तरप्रदेश में कांग्रेस तैयारी करती हुई नज़र आ रही है।

उत्तरप्रदेश में अजय राय कांग्रेस की रीति, नीति और कूटनीति देखेंगे। गुरुवार को  उन्हें यूपी कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार दिया गया है। जानकारी के लिए बता दें ये वही अजय राय हैं जो 2014 और 2019 के चुनावों में नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ चुके हैं। 2014 के मुकाबले 2019 में उनके वोटों का काउंट जरूर बढ़ा लेकिन उन्हें चुनाव में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं अजय राय बीजेपी से ही विधायक भी रह चुके हैं।

पढ़ें :- AAP सांसद संजय सिंह का इल्जाम, 'जेल में ही CM केजरीवाल को मारने की साजिश’

लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट पर दावेदारी न मिलने से वो नाराज़ हुए और बीजेपी का साथ छोड़ दिया। समाजवादी पार्टी भी ज्वाइन की और उसे भी छोड़ दिया। अब सवाल ये है कि चेहरा बदलकर क्या कांग्रेस अपनी साख हासिल कर पाएगी? कांग्रेस के अनुसार अजय राय एक बड़े भूमिहार चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं। जिन्हें कांग्रेस ने कमान दी है। बृजलाल खाबरी जब उत्तरप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे तो कांग्रेस ने सवर्ण के साथ दलित राजनीति को साधने की कोशिश की।

भूमिहार वोटबैंक को साधने की कोशिश में कांग्रेस 

अब अजय राय को उत्तरप्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस भूमिहार वोटबैंक को साधने की कोशिश कर रही है। बात ये है कि भूमिहार वर्ग की पकड़ ब्राह्मण और राजपूत दोनों ही वोटबैंक में नजर आती है। पूर्वांचल में 2 से 3 प्रतिशत से अधिक भूमिहार नहीं हैं।

भूमिहारों की अगर बात रही तो भूमिहारों में विकासपुरुष के नाम से जाने-जाने वाले बीजेपी नेता और जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी गाजीपुर लोकसभा सीट पर अफजाल अंसारी से हार गए थे। ऐसे में भूमिहारों को साधने का तो कोई फ़ायदा नहीं है। वहीं अगर इंडिया गठबंधन की दृष्टि से देखें तो भी कांग्रेस का ये पैंतरा फेल होता हुआ नजर आ रहा है।

क्योंकि इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के साथ-साथ अखिलेश यादव भी चलते नजर आ रहे हैं जो मुस्लिम- यादव समीकरण को साधने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में अखिलेश के वोटबैंक से इतर कांग्रेस भूमिहारों को साधने की कोशिश कर रही है जो पूर्वांचल की आबादी का सिर्फ 2-3 प्रतिशत हैं। ऐसे में ये दांव तो फेल है। वहीं बीजेपी लोकसभा चुनाव में मंडल-कमंडल साथ लेकर चल रही है।

पढ़ें :- भगवान भोले के भक्तों ने गंगाजल, बेलपत्र, दूध और शहद से किया भोलेशंकर का जलाभिषेक

साथ में युवा और महिला वोटबैंक को भी बीजेपी साध रही है। अब उत्तरप्रदेश में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का चेहरा बदलने का पैंतरा तो फेल होता हुआ नजर आ रहा है। क्योंकि कांग्रेस की रणनीति में अभी भी धुंधलापन है। अब मिशन 2024 तो खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। अब बैटलग्राउंड पर क्या कमाल करते हैं उत्तरप्रदेश में कांग्रेस के सेनापति। ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook, YouTube और Twitter पर फॉलो करे...
Booking.com
Booking.com
Booking.com
Booking.com