Delhi : दिल्ली सरकार की ‘विद्या वाहिनी योजना’ के तहत कक्षा 9 की छात्राओं को साइकिलें वितरित की गईं।✍️Arvind Kumar
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Delhi : दिल्ली सरकार की ‘विद्या वाहिनी योजना’ के तहत कक्षा 9 की छात्राओं को साइकिलें वितरित की गईं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बेटियों की शिक्षा में किया गया निवेश समाज के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। इस साल करीब 1.40 लाख छात्राओं को योजना का लाभ मिलेगा।
नई दिल्ली में सोमवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा परिसर में ‘विद्या वाहिनी योजना’ के तहत कक्षा 9 में पढ़ने वाली छात्राओं को साइकिलें वितरित कीं। इस दौरान उत्तरी जिले के जोन-7 की 200 छात्राओं को साइकिल दी गई। साइकिल मिलने के बाद छात्राओं में खासा उत्साह नजर आया। छात्राओं ने कहा कि इससे स्कूल आने-जाने में समय की बचत होगी और परिवहन की परेशानी कम होगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि साइकिल सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि बेटियों की शिक्षा और उनके सपनों को आगे बढ़ाने का माध्यम है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूरी या परिवहन की समस्या किसी भी बेटी की पढ़ाई में बाधा न बने। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कक्षा 9 में पढ़ने वाली करीब 1.40 लाख छात्राओं को ‘विद्या वाहिनी योजना’ के तहत साइकिलें दी जाएंगी।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली की स्कूली शिक्षा ऐतिहासिक बदलाव की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि छात्राओं को साइकिल देना केवल सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने और बाधाओं को पार कर आगे बढ़ने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि दिल्ली की कोई भी छात्रा आर्थिक या परिवहन संबंधी परेशानी के कारण शिक्षा की यात्रा में पीछे न छूटे। मुख्यमंत्री ने छात्राओं से इस सुविधा का उपयोग अपनी पढ़ाई को मजबूत करने और अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए करने की अपील की।
गौरतलब है कि इस योजना से दिल्ली की बेटियों की शिक्षा को आसान बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘विद्या वाहिनी योजना’ के तहत 200 छात्राओं को साइकिलें बांटीं। इस साल करीब 1 लाख 40 हजार छात्राओं को साइकिल मिलेगी। सरकार का दावा है कि इससे पढ़ाई और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
Disclaimer
यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक बयानों, आधिकारिक अभिलेखों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के विश्लेषण पर आधारित है। लेख में जिन आरोपों या दावों का उल्लेख किया गया है, उनमें से कई की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे दावों को उसी संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है और उन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
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