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उत्तराखंड की सरकार का एक साल का कार्यकाल हुआ पूरा…. गिनाई कई बड़ी उपलब्धियां

22 मार्च 2022 को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी... 23 मार्च 2023 को 1 साल का कार्यकाल पूरा हो गया.

By Shahi 

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सीएम धामी की दूसरी पारी का एक साल पूरा हो गया इस अवसर पर प्रदेश में इसका भव्य आयोजन किया गया…तमाम जिलों में और ब्लॉक स्तरों पर लोगों को सीएम के काम के बारे में बताया गया. इसी के साथ विकास पुस्तिका का इनोग्रेशन भी किया गया जिससे पता चल पाए आम जनता को की सरकार क्या-क्या काम कर रहीं है और यह काम प्रदेश के लिए कितना लाभदायक है.

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एक साल में उपलब्धियां

  • अगर सीएम धामी के एक साल के कार्यकाल में मिली उपलब्धियों की बात करें तो सबसे पहले नाम आता है महिला आरक्षण का इस आरक्षण की मांग लगातार उत्तराखंड में हो रही है जब से कांग्रेस की सरकार थी तब भी महिला आरक्षण की बात हो रही थी लेकिन कांग्रेस महिला को आरक्षण नहीं दिला पाई और यह काम धामी सरकार ने कर दिखाया. बता दें कि हाई कोर्ट ने महिला आरक्षण पर रोक लगा दी थी पर धामी सरकार ने इसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और कानून बना दिया.
  • बात की जाए राज्य आंदोलनकारियों की तो 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण को लेकर भी सरकार के ऊपर दबाव बनाया गया था फिर क्या था सीएम धामी ने 7 साल से अधूरे पड़े इस विधेयक को पास कराया और कैबिनेट में राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण देने का फैसला लिया.
  • फिर आता है धर्मांतरण पर रोक का फैसला जो कि सीएम धामी की सरकार में लिए गए बड़े फैसलों में से एक हैं, धामी सरकार ने जबरन धर्मांतरण कानून को और ज्यादा कठोर कर दिया और इसमें 10 साल तक सजा मिलने का प्रावधान किया गया.
  • सबसे बड़ा एक फैसला धामी सरकार का नकल विरोधी कानून भी रहा बता दें कि परीक्षाओं में लगातार नकल सामने आने के बाद से सीएम धामी ने इस पर कानून बनाया और 10 साल तक की सजा और प्रोपर्टी करने के सख्त प्रावधान रखा गया हैं.
  •  एक बड़ी उपलब्धि धामी सरकार की विस बैकडोर भर्ती की भी हैं..बता दें विधानसभा में बैरडोर से लगे 228 काम करने वाले लोगों को बाहर निकाला और स्पीकर से अनुरोध किया गया उसके बाद इसकी अनुमति मिली.

आगे कौन से बड़ी चुनौतियां ?

एक साल धामी सरकार का बेमिसाल रहा लेकिन आगे का 4 साल अभी बाकी है धामी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह भी है ये आगे के 4 साल को कैसे पूरा करेंगे क्योंकि इस चार साल में निकाय चुनाव, लोकसभा चुनाव होना है इसके साथ सबसे बड़ी चुनौती यह भी खड़ी है कि किस तरीके से चार धाम यात्रा को सुगम बनाया जाए ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरीके की परेशानी ना हो.

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