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Ghaziabad : GMC की अनूठी पहल, प्ले स्कूल में कूड़ा बीनने वालों के बच्चे भी पढ़ेंगे

गार्बेज फैक्टरी परिसर में 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एक सेंटर बनाया गया है। ये सेंटर एक प्ले स्कूल की तरह से बनाया गया है।

By इंडिया वॉइस 
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गाजियाबाद, 14 अप्रैल। शिक्षा मानव संसाधन के विकास का मूल है, जो देश के सामाजिक-आर्थिक तंत्र के संतुलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी के तहत गाजियाबाद नगर निगम (GMC) ने गार्बेज फैक्टरी में कार्यरत गार्बेज सेग्रीगेटर (कूड़ा संग्रहकर्ता) के बच्चों के बेहतर स्वास्थ, शिक्षा और सुनहरे भविष्य को ध्यान में रखते हुए अनूठी पहल शुरू की है। इसके मद्देनजर गार्बेज फैक्टरी परिसर में 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एक सेंटर बनाया गया है। ये सेंटर एक प्ले स्कूल की तरह से बनाया गया है। जहां इन बच्चों को एक अलग माहौल मिल सकेगा। माता-पिता के काम करने के दौरान ये बच्चे कूड़ा-करकट से ना सिर्फ दूर रहेंगे, बल्कि अच्छे माहौल में खेलने के साथ-साथ यहां पढ़ाई भी कर सकेंगे। अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा की चिंता नहीं रहेगी।

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रैग पीकर को गार्बेज सेग्रीगेटर के रूप में मिली नई पहचान

GMC का ध्यान रैगर यानी कूड़ा संग्रहकर्ता को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की योजना पर केंद्रित है। इस कड़ी में पहले रैग पीकर को गार्बेज सेग्रीगेटर के रूप में नई पहचान देकर नगर निगम के स्वच्छता कार्यक्रम से जोड़ा गया। सफाई व्यवस्था से जुड़े कामों में इन्हें लगाया गया। इन्हें ड्रेस और पहचान पत्र उपलब्ध कराया गया। गुरुवार से ये डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, गार्बेज फैक्टरी सहित अन्य स्थानों पर ये गार्बेज सेग्रीगेटर के रूप में काम कर रहे हैं। गार्बेज सेग्रीगेटर के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने को लेकर भी नगर निगम काम कर रहा है।

बच्चों की संख्या के आधार पर रैगी बाल गोपाल सेंटर

नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि गार्बेज सेग्रीगेटर को मुख्यधारा से जोड़ने के साथ-साथ उनके बच्चों की बेहतरी के लिए भी काम किया जा रहा है। योजना बनाई गई हैं कि जहां भी अधिक संख्या में महिला गार्बेज सेग्रीगेटर काम कर रहे हैं, वहां पर एक रैगी बाल गोपाल सेंटर बनाया जाए। रेत मंडी स्थित गार्बेज फैक्टरी से इसकी शुरुआत की गई है। गार्बेज फैक्टरी में शहर के कई हिस्सों से प्रतिदिन कई सौ मीट्रिक टन कूड़ा-कचरा पहुंचता है। फैक्टरी परिसर में कूड़े को अलग-अलग कर निस्तारण की व्यवस्था की गई है। गार्बेज फैक्टरी में 200 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से अधिकांश गार्बेज सेग्रीगेटर हैं। गार्बेज सेग्रीगेटर कूड़े को छांट कर अलग-अलग करते हैं। इन गार्बेज सेग्रीगेटर के 30 से ज्यादा ऐसे बच्चे हैं, जिनकी उम्र 10 साल से कम है। माता-पिता दोनों के काम करने के कारण इनके छोटे बच्चों की देखरेख में अक्सर परेशानी आती है। गार्बेज फैक्टरी में कार्यरत गार्बेज सेग्रीगेटर्स मजबूरीवश अपने इन बच्चों को साथ में रखते हैं। इन नौनिहालों के भविष्य को बेहतर बनाने और उन्हें अपने माता-पिता के पास रखने को लेकर यह इंतजाम किया गया है।

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प्ले स्कूल में बच्चों के खेलने और रहने की व्यवस्था

नगरायुक्त तंवर ने बताया कि फैक्टरी परिसर में रैगी बाल गोपाल सेंटर की शुरुआत की गई है। इस प्ले स्कूल में बच्चों के खेलने और रहने की व्यवस्था है। अब इन बच्चों के पढ़ाई की भी व्यवस्था कराई जा रही है। मसलन माता-पिता जब कूड़े की छंटाई का काम करेंगे, उस समय ये बच्चे सुरक्षित माहौल में यहां रहेंगे और पढ़ाई भी कर सकेंगे। गंदगी से दूर रहने से इन बच्चों का स्वास्थ्य भी प्रभावित नहीं होगा। प्ले स्कूल में केयरटेकर की तैनाती की गई है। बच्चों के स्वास्थ्य का भी समय-समय पर परीक्षण कराया जाएगा। गार्बेज फैक्टरी में कैंटीन की भी व्यवस्था कराई गई है।

नगरायुक्त ने बताया कि गार्बेज सेग्रीगेटर के बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में नगर निगम ने प्रयास किए हैं। गार्बेज फैक्टरी में बाल गोपाल सेंटर की स्थापना का असल मकसद वहां कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों को अच्छा माहौल उपलब्ध कराना है। रैगी बाल गोपाल सेंटर प्ले स्कूल में बच्चों के खेलकूद, शिक्षा एवं स्वास्थ्य को लेकर उचित इंतजाम किए गए हैं।

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