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Mining Lease Case : मुख्यमंत्री से जुड़े लीज मामले में सुनवाई जारी रहेगी, हाई कोर्ट ने कहा- कहीं भी चुनौती देने की आजादी

मनरेगा घोटाले मामले पर भी सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने कहा कि जब ईडी ने कार्रवाई की तब सरकार को याद आया कि राशि निकाली गयी। सरकार ने इस पर पहले FIR नहीं की। सरकार से सवाल पूछते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर ये ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला है तो करप्शन से इंकार क्यों।

By इंडिया वॉइस 
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रांची, 10 जून। झारखंड हाई कोर्ट में शुक्रवार को चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस एस एन प्रसाद की बेंच में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े माइनिंग लीज और आय से अधिक संपत्ति मामले में सुनवाई हुई।

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कोर्ट में सुनवाई के दौरान खंडपीठ को महाधिवक्ता ने बताया कि हम सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए फिलहाल सुनवाई रोकी जाए। इस पर खंडपीठ ने कहा कि सुनवाई हाई कोर्ट में जारी रह सकती है। पहले भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस मामले में आ चुका है। कोर्ट ने साफ कहा कि सुनवाई जारी रहेगी। आपको कहीं भी चुनौती देने की आजादी है। दोनों ही मामलों के प्रार्थी शिव शंकर शर्मा हैं, जिनके अधिवक्ता राजीव कुमार हैं। गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य बताया था। अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई के लिए 17 जून की तारीख तय की है।

कोर्ट ने माना था मेंटेंनेबल है याचिका

पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने दोनों याचिका को मेंटेंनेबल बताते हुए सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया था। इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ता पर सवाल उठाए थे। वहीं झारखंड हाई कोर्ट में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ 11 फरवरी को जनहित याचिका दायर की गयी थी। प्रार्थी शिव शंकर शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जिम्मे खनन और वन पर्यावरण विभाग भी हैं। उन्होंने खुद पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए आवेदन दिया और खनन पट्टा हासिल की। ऐसा करना पद का दुरुपयोग और जनप्रतिनिधि अधिनियम का उल्लंघन है। इसलिए इस पूरे मामले की CBI से जांच कराई जाए। प्रार्थी ने याचिका के माध्यम से हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द करने की मांग भी की है।

मनरेगा घोटाला मामले में भी सुनवाई हुई

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इस मामले के साथ ही मनरेगा घोटाले मामले पर भी सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने कहा कि जब ईडी ने कार्रवाई की तब सरकार को याद आया कि राशि निकाली गयी। सरकार ने इस पर पहले एफआईआर नहीं किया। सरकार से सवाल पूछते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर ये ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला है तो करप्शन से इंकार क्यों।

कोर्ट में महाधिवक्ता और हाई कोर्ट के बीच सवाल-जवाब

वहीं हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले में चुनाव आयोग ने कहा है कि मामला हाई कोर्ट में लंबित है। इसलिए मामले में जल्द से जल्द सुनवाई करनी चाहिए। अगर 727/22 में कोई आपत्ति नहीं है तो आगे बढ़ने में क्या परेशानी है। महाधिवक्ता ने कहा कि मामले की सुनवाई हाइब्रिड मोड में की जाए। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि फ़िज़िकल सुनवाई में क्या परेशानी थी। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आपने अबतक निलंबित पूजा सिंघल पर FIR क्यूं नहीं की थी। ED की कार्रवाई के बाद मनरेगा घोटाला का पैसा निकला तब आपको याद आया। अगर ये ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला है तो करप्शन से इनकार कैसे करें।

तो उधर राजीव कुमार ने कोर्ट में फिर से एक दागी अफ़सर का हलफ़नामा दायर किया है। इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि आप लोग के पास साफ़ छवि के कोई अफसर नहीं है क्या?। सरकार ने एक आइए फ़ाइल किया है, जिसमें कहा कि आप 727/22 में सुनवाई ना करें।

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