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कश्मीर घाटी से पलायन को मजबूर हो रहे हिंदू परिवार

कश्मीर घाटी के एक स्कूल में पढ़ा रही जम्मू की अध्यापिका रजनीबाला की हत्या ने कश्मीर में तूफान-सा खड़ा कर दिया है। कश्मीर के हजारों अल्पसंख्यक हिंदू कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं और वे उप-राज्यपाल से मांग कर रहे हैं कि उन्हें घाटी के बाहर स्थानांतरित किया जाए, वरना वे सामूहिक रुप से बाहर जाने का रास्ता अपनाएंगे।

By इंडिया वॉइस 
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नई दिल्ली, 2 जून 2022। जम्मू-कश्मीर में जबसे धारा 370 हटी है, वहां राजनीतिक उठा-पटक और आतंकवादी घटनाओं में काफी कमी हुई है लेकिन इधर पिछले कुछ हफ्तों में आतंकवाद ने फिर से जोर पकड़ लिया है। कश्मीर घाटी के एक स्कूल में पढ़ा रही जम्मू की अध्यापिका रजनीबाला की हत्या ने कश्मीर में तूफान-सा खड़ा कर दिया है। कश्मीर के हजारों अल्पसंख्यक हिंदू कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं और वे उप-राज्यपाल से मांग कर रहे हैं कि उन्हें घाटी के बाहर स्थानांतरित किया जाए, वरना वे सामूहिक रुप से बाहर जाने का रास्ता अपनाएंगे। उनका यह आक्रोश तो स्वाभाविक है लेकिन उनकी मांग को क्रियान्वित करने में अनेक व्यावहारिक कठिनाइयां हैं। वहीं कश्मीर एयरपोर्ट पर कश्मीर पंडित भारी संख्या में पहुंचकर पलायन की तैयारी कर रहे हैं।

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यहां एक सवाल तो यही है कि क्या आतंकवादी सिर्फ हिंदू पंडितों को ही मार रहे हैं? यह तो ठीक है कि मरने वालों में हिंदू पंडितों की संख्या ज्यादा है, क्योंकि एक तो वे प्रभावशाली हैं, मुखर हैं और उनकी संख्या भी ज्यादा है लेकिन रजनीबाला तो पंडित नहीं थी। वह तो दलित थी। इसके अलावा हम थोड़े और गहरे उतरें तो पता चलेगा कि इस वर्ष अब तक आतंकवादियों ने 13 लोगों की हत्या की है, उनमें चार पुलिस के जवान थे, तीन हिंदू थे और छह मुसलमान थे। इन मुसलमानों में पुलिस वालों के अलावा पंच, सरपंच और टीवी की एक महिला कलाकार भी थी।

कहने का अर्थ यह कि आतंकवादी सबके ही दुश्मन हैं। वे जिनसे भी घृणा करते हैं, उनकी हत्या करना अपना धर्म समझते हैं। ऐसे ही हिंसक उग्रवादियों की मेहरबानी के कारण आज पाकिस्तान और अफगानिस्तान बिल्कुल खस्ता-हाल हुए जा रहे हैं।

हाल ही में सरकार ने कश्मीरी पंडितों की कब्जाई संपत्तियों को उन्हें दोबारा देने की कवायद शुरू की थी। जानकारी के अनुसार अब तक ऐसे लगभग 1,000 मामलों का निपटारा किया गया और संपत्ति को वापस उनके असली मालिक के हवाले कर दिया गया। वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि घाटी में अचानक शुरू हुई हिंसा का ये भी एक बड़ा कारण माना जा सकता है।

कश्मीर में बीते कुछ हफ्तों से आतंकवादी हमलों में जो बढ़त हुई है, उसका एक कारण यह भी लगता है कि ये आतंकवादी नहीं चाहते कि भारत-पाक रिश्तों में जो सुधार के संकेत इधर मिल रहे हैं, उन्हें सफल होने दिया जाए। इधर जब से शाहबाज शरीफ की सरकार बनी है, दोनों देशों के नेताओं का रवैया रचनात्मक दिख रहा है। दोनों देश सीमा पर युद्ध विराम समझौते का पालन कर रहे हैं और सिंधु-जल विवाद को निपटाने के लिए हाल ही में दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक दिल्ली में हुई है। पाकिस्तान के व्यापारी भी बंद हुए आपसी व्यापार को खुलवाने का आग्रह कर रहे हैं। आतंकवादियों के लिए यह सब तथ्य काफी निराशाजनक हैं। इसीलिए वे निर्दोषों को मार कर घाटी में डर का माहौल बनाना चाहते हैं।

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उनकी हिंसा की सभी कश्मीरी नेताओं ने कड़ी निंदा की है और उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी कठोर शब्दों में आतंकवादी हत्यारों को शीघ्र ही दंडित करने की घोषणा की है। लेकिन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारत के अन्य राज्यों के नागरिको की तरह ही कश्मीर में हिंदू व अन्य पीड़ित परिवारों व आतंकियों की दहशत के साये में जीने वाले नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने जल्द ही कोई ठोस कदम उठाने होंगे। यदि इस मामले पर कोई रास्ता नहीं निकाला गया तो भविष्य में भी ये एक बड़ा मुद्दा बना रहेगा।

विपक्षी दल हुआ हमलावर

कांग्रेस नेता राहुल ने गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है “बैंक मैनेजर, टीचर और कई मासूम लोग रोज़ मारे जा रहे हैं, कश्मीरी पंडित पलायन कर रहे हैं। जिनको इनकी सुरक्षा करनी है, उनको फिल्म के प्रमोशन से फुर्सत नहीं है। भाजपा ने कश्मीर को सिर्फ अपनी सत्ता की सीढ़ी बनाया है। कश्मीर में अमन कायम करने के लिए तुरंत कदम उठाइए, प्रधानमंत्री जी।”

कांग्रेस के राहुल गांधी के बाद पार्टी के महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने भी कश्मीर मामले पर ट्वीट करते हुए लिखा कि “100 कश्मीरी हिंदू परिवार पलायन कर गए। दहशत में खड़ी भीड़ यूक्रेन में नहीं-श्रीनगर एयरपोर्ट पर है! आज फ़िर आतंकियों ने नोहर,राजस्थान निवासी बैंक मैनेजर विजय बेनीवाल की हत्या कर दी। प्रजातंत्र के चीरहरण में लगे राजस्थान के भाजपा नेता मोदी जी से कार्यवाही की मांग क्यों नहीं करते?”

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