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kerala News:केरल में बर्ड फ्लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने भेजी टीम,20 हजार से अधिक पक्षियों को मारने का फैसला

Bird Flu Case In kerala:केरल के अलाप्पुझा जिले में बत्तखों में एवियन इंफ्लुएंजा के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सतर्कता बढ़ा दी है,गुरुवार को केंद्रीय मंत्रालय की तरफ से सात सदस्यीय एक दल की टिम को एवियन फ्लू से जुड़े मामलों की जांच के लिए केरल भेजा गया है,सात सदस्यीय एक दल की टिम केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अपनी जांच की रिपोर्ट सौपने के साथ ही इसको रोकने के तरीको को भी बताएगा,इसे रोकने के लिए हरिपद नगरपालिका के वझुथनम वार्ड में 20,000 से अधिक पक्षियों को मारने के लिए अभियान शुरू किया गया है

By रेनू मिश्रा 
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kerala News:केरल के अलाप्पुझा जिले में बत्तखों में एवियन इंफ्लुएंजा के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सतर्कता बढ़ा दी है,गुरुवार को केंद्रीय मंत्रालय की तरफ से सात सदस्यीय एक दल की टिम को एवियन फ्लू से जुड़े मामलों की जांच के लिए केरल भेजा गया है,सात सदस्यीय एक दल की टिम केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अपनी जांच की रिपोर्ट सौपने के साथ ही इसको रोकने के तरीको को भी बताएगा,इसे रोकने के लिए हरिपद नगरपालिका के वझुथनम वार्ड में 20,000 से अधिक पक्षियों को मारने के लिए अभियान शुरू किया गया है

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अलाप्पुझा जिले में बत्तखों में एवियन फ्लू बीमारी फैलने की पुष्टि होने के साथ ही अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को इस रोग के प्रसार पर काबू के लिए यहां हरिपद नगरपालिका के वझुथनम वार्ड में 20,000 से अधिक पक्षियों को मारने के लिए अभियान शुरू किया. भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान में हाल ही में नमूनों की जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई थी. जिला अधिकारियों ने यहां एक बयान में कहा कि 28 अक्टूबर शनिवार से इस बीमारी के केंद्र के एक किलोमीटर के घेरे में स्थित घरों के सभी पक्षियों को मारा जाएगा.

बयान में कहा गया है कि 20,471 बत्तखों को मारा जाएगा और आठ त्वरित प्रतिक्रिया दल (आरआरटी) इस संबंध में केंद्रीय मानदंडों का पालन करते हुए ऑपरेशन में लगे हुए हैं. बयान के अनुसार पक्षियों के मारे जाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी हरिपद नगरपालिका, पल्लीपाड़ पंचायत और आसपास के इलाकों में एक सप्ताह तक स्वास्थ्य एवं पशु कल्याण विभाग द्वारा निगरानी की जाती रहेगी. बीमारी फैलने के स्थान से एक किलोमीटर के घेरे में पक्षियों के परिवहन पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया है.

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