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पूर्वांचल को मिली खौफ से मुक्तिः  माफिया मुख्तार अंसारी की Heart Attack से मौत, बांदा जेल में था निरुद्ध

बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी की गुरुवार रात दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। अंसारी को गुरुवार रात करीब साढे आठ बजे नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था। उपचार के दौरान उसकी सेहत बिगड़ती चली गयी और हर्ट अटैक से उसकी मौत हो गई।  माफिया की मौत के बाद एहतियात के तौर पर बांदा,गाजीपुर और मऊ में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

By HO BUREAU 

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लखनऊ। बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी की गुरुवार रात दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। अंसारी को गुरुवार रात करीब साढे आठ बजे नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था। उपचार के दौरान उसकी सेहत बिगड़ती चली गयी और हर्ट अटैक से उसकी मौत हो गई।  माफिया की मौत के बाद एहतियात के तौर पर बांदा,गाजीपुर और मऊ में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

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तीनों ही जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है। मुख्तार पिछले करीब ढाई साल से बांदा जेल में बंद था। उसके खिलाफ 64 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। मेडिकल कालेज अस्पताल ने एक मेडिकल बुलेटिन जारी कर मुख्तार की मौत की पुष्टि की है। जिसके अनुसार 63 वर्षीय मुख्तार को रात आठ बजकर 25 मिनट पर उल्टी की शिकायत पर बेहोशी की हालत में लाया गया था।

सूचना मिलते ही जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल, एसपी अंकुर अग्रवाल कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ मंडलीय कारागार पहुंचे। करीब 40 मिनट तक अधिकारी जेल के भीतर रहे। इसके बाद मुख्तार को एंबुलेंस से दोबारा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। बताया जा रहा है कि मुख्तार को दिल का दौरा पड़ा है। रात में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

33 साल से अधिक पुराने फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में मुख्तार को हुई थी उम्रकैद

नौ डाक्टरों की टीम ने उसका इलाज शुरु किया मगर भरसक प्रयास के बावजूद हर्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। इससे पहले मंगलवार को पेट संबंधी समस्या के कारण मुख्तार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां आराम मिलने के बाद उसे जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। मालूम हो कि 33 साल से अधिक पुराने फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में मुख्तार को वाराणसी की विशेष अदालत ने 2.02 लाख रुपए जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

जून 1987 में मुख्तार ने तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट  ग़ाज़ीपुर के कार्यालय में डबल बैरल बंदूक के लाइसेंस के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किया। आरोप था कि स्टाफ की मिलीभगत से मुख्तार ने डीएम और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) के फर्जी हस्ताक्षर से लाइसेंस हासिल कर लिया था। तीन दिनों से बीमार चल रहे जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी की तबीयत गुरुवार रात अचानक फिर बिगड़ गई।

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मुख्तार की मौत के साथ ही पूर्वांचल में चार दशक पुरानी गैंगवार का अंत

माफिया मुख्तार अंसारी की मौत के साथ ही पूर्वांचल में चार दशक पुरानी गैंगवार का अंत हो गया। पूर्व MLC बृजेश सिंह और पूर्व MLA मुख्तार अंसारी की अदावत के किस्से बनारस की गलियों से लेकर गाजीपुर, मऊ और बलिया के चट्टी-चौराहों तक आज भी बड़े चाव से सुने जाते हैं। अस्सी के दशक में मुड़ियार गांव के रामपत प्रधान सिंह और उनके भतीजों और साधू व मकनू के बीच पांच बीघा जमीन को लेकर विवाद हुआ था।

विवाद ने कुछ इस कदर तूल पकड़ा कि साधू और मकनू ने लाठियों से पीट कर रामपत सिंह और फिर कुछ समय बाद उनके तीन बेटों की भी हत्या कर दी। रामपत और उनके तीन बेटों की हत्या के बाद उनके दो बेटों त्रिभुवन और राजेंद्र को गांव छोड़ना पड़ा था। इधर मनबढ़ मुख्तार भी मोहम्मदाबाद क्षेत्र में अपने पैर पसार रहा था।

कहा जाता है कि उन्हीं दिनों मुख्तार के पिता सुभानल्लाह और सच्चिदानंद के बीच सरेराह कहासुनी हुई थी। इस पर मुख्तार ने सच्चिदानंद राय की हत्या का निर्णय लिया।  साधु और मकनू ने सच्चिदानंद राय की हत्या में मुख्तार की मदद की तो वह उन्हें अपना गुरु मानने लगा। इसके बाद साधू और मकनू के कहने पर मुख्तार ने रामू मल्लाह से मदद लेकर सैदपुर क्षेत्र के मेदिनीपुर के रणजीत सिंह की हत्या की।

धीरे-धीरे साधू-मकनू और उनके गुर्गे मुख्तार का नाम पूरे पूर्वांचल में कुख्यात हो गया था।  वर्ष 1984 में वाराणसी के धौरहरा गांव में बृजेश सिंह के पिता रवींद्रनाथ सिंह की हत्या बंशी और पांचू सहित अन्य लोगों ने की। बंशी और पांचू का जुड़ाव साधु और मकनू के गिरोह से था। इसके बाद हरिहर सिंह, चंदौली के सिकरारा गांव के पूर्व प्रधान रामचंद्र यादव सहित परिवार के सात लोग और साधु-मकनू सहित कई अन्य लोगों की गैंगवार में हत्या होती रही।

पंजाब के रोपड़ सहित आठ जेलों में रहा करीब 19 साल

मुख्तार अंसारी 25 अक्तूबर 2005 को जेल गया था। इसके बाद कभी जमानत पर बाहर नहीं आया। मौत से पहले तक वह 18 साल छह माह तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहा। इस दौरान उसने गाजीपुर, मऊ, लखनऊ, उन्नाव, जौनपुर, पंजाब के रोपड़, चित्रकूट और बांदा जेल में रहा।

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2001 में पूरे UP में गूंजा था उसरी चट्टी कांड

15 जुलाई 2001 को मुख्तार अंसारी अपने निर्वाचन क्षेत्र मऊ जा रहा था। दोपहर 12:30 बजे उसरी चट्टी पर उसके काफिले पर जानलेवा हमला किया गया था। फायरिंग में तीन लोगों की जान चली गई थी। इसे लेकर मुख्तार अंसारी ने बृजेश सिंह और उसके करीबी त्रिभुवन सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। अभी यह मुकदमा गाजीपुर की अदालत में विचाराधीन है। इस मामले में 21 वर्ष बाद पिछले साल जनवरी महीने में मुख्तार अंसारी के खिलाफ भी हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।

बड़ा बेटा जेल में, छोटा जमानत पर, बहू और पत्नी फरार

मुख्तार अंसारी का बड़ा बेटा और मऊ विधायक अब्बास अंसारी जेल में है। बहू निकहत जेल से बाहर है। अब्बास अंसारी मऊ से सुभासपा के टिकट पर 2022 में विधायक बना। जबकि अब्बास की पत्नी निकहत बानो है, जिनपर कुल 9 मुकदमे हैं और वह इस समय जेल में है। दूसरा बेटा उमर अंसारी है, जिसपर छह मुकदमे हैं, इस समय जमानत पर बाहर है। जबकि मुख्तार अंसारी की पत्नी अफशां अंसारी फरार है, जिसपर कुल 13 मुकदमे हैं। गाजीपुर पुलिस ने अफशां पर 50 हजार का इनाम भी घोषित किया है।

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