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Shattila Ekadashi 2022: षटतिला एकादशी में इस तरह करें तिल का उपयोग, मिलेगा पुण्य

Shattila Ekadashi Rules 2022: हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व होता है। एकादशी हर महीने में दो बार पड़ती है। हर माह पड़ने वाली एकादशी का अपना एक अलग ही महत्व होता है।

By Vikas Arya 
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नई दिल्ली, विकास आर्य। Shattila Ekadashi Rules 2022: हिंदू धर्म में एकादशी (Ekadashi 2022) का विशेष महत्व है। हर माह में दो एकादशी पड़ती हैं और हर एकादशी का अपना अलग महत्व होता है। माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा (Lord Vishnu Puja) की जाती है। माघ मास में पड़ने वाली षटतिला एकादशी में तिल का छह तरीके से प्रयोग करना बहुत शुभ माना जाता है।

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मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को कन्यादान, हजारों सालों की तपस्या और स्वर्ण दान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। कहते हैं कि व्यक्ति जीवन के सारे सुख भोगकर आखिर में परमधाम की ओर जाता है। इस साल षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi On 28th January 2022) 28 जनवरी 2022, शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। षटतिला एकादशी के दिन जानें तिल का छह तरीके से कैसे प्रयोग किया जाता है।

तिल के उपयोग का विशेष महत्व, कैसे करें तिल का इस्तेमाल (Use Sesame On Shattila Ekadashi 2022 )

माघ मास में आने वाली एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी में तिल का विशेष रूप से इस्तेमाल करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन पहले तिल मिश्रित जल से स्नान करना चाहिए। दूसरा तिल का उबटन लगाएं, तीसरा भगवान विष्णु को तिल अर्पित करें, चौथा तिल मिश्रित जल का सेवन करें, पांचवां फलाहार के समय तिल का मिष्ठान ग्रहण करें और छठवां एकादशी के दिन तिल से हवन करें या तिल का दान करें। षटतिला एकादशी के दिन व्रत न करने पर भी इन छह तरीकों से तिल का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

क्या है षटतिला एकादशी के नियम (Ekadashi Vrat Rules)

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1. एकादशी व्रत सदैव दशमी के दिन सूर्यास्त के बाद से शुरू हो जाता है और द्वादशी के दिन व्रत का पारण किया जाता है। व्रत का पारण भी मुहूर्त के हिसाब से ही करना चाहिए।
2. दशमी के दिन भी सूर्यास्त से पहले बिना प्याज लहसुन का साधारण भोजन करना चाहिए। रात में भगवान का मनन करते हुए ही सोना चाहिए। अगर संभव हो तो इस दिन जमीन पर बिस्तर लगा कर ही सोएं।
3. एकादशी के दिन सुबह उठने के बाद स्नान आदि से निवृत्त हों। इसके बाद भगवान के समक्ष एकादशी व्रत का संकल्प लें। फिर विधि विधान से पूजन करें। इस दौरान षटतिला एकादशी की व्रत कथा अवश्य करें।
4. संभव हो सके तो दिनभर निराहार रहते हुए एक समय ही फलाहार ग्रहण करें। इस दिन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें। इस दिन किसी के बारे में गलत विचार न रखें। एकादशी के दिन सिर्फ प्रभु का नाम लें।
5. एकादशी के अगले दिन द्वादशी पर स्नान आदि के बाद भगवान का पूजन करें। ब्राह्मण को भोजन कराएं और सामर्थ्य के अनुसार दान दें। इसके बाद ही व्रत का पारण करें।

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