Ranchi : प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन के विरोध में रविवार, 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ का आयोजन किया गया।✍️Vishwajeet bhatt
Updated Date
Ranchi : प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन के विरोध में रविवार, 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ का आयोजन किया गया। झारखंड के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग इस महाजुटान में शामिल हुए। आयोजकों का कहना था कि परिसीमन की प्रक्रिया में आदिवासी आबादी के हितों और संवैधानिक अधिकारों का ध्यान रखा जाना जरूरी है।
रैली में झारखंड के सभी 24 जिलों से लोगों के पहुंचने का दावा किया गया। हजारीबाग जिले से करीब 10 हजार आदिवासियों के शामिल होने की खबर है। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की समेत विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों के नेतृत्व में आयोजित इस महाजुटान में परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया गया।
आदिवासी संगठनों को आशंका है कि भविष्य में होने वाले परिसीमन से झारखंड में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या प्रभावित हो सकती है। संगठनों की मांग है कि परिसीमन में सिर्फ जनसंख्या को आधार न बनाया जाए, बल्कि विस्थापन, पलायन और आदिवासी आबादी में आए बदलाव जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाए।
महाजुटान में संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी क्षेत्रों को मिले अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई गई। इसके साथ ही लोकसभा और विधानसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया गया।
रैली में पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पेसा (PESA) कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग भी उठी। आदिवासी संगठनों का कहना था कि ग्रामसभा और स्थानीय समुदायों के अधिकारों को मजबूत किए बिना आदिवासी क्षेत्रों का समुचित विकास संभव नहीं है।
महाजुटान में आदिवासी जमीन की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख रहा। आयोजकों और विभिन्न संगठनों की ओर से लैंड बैंक और लैंड पूल जैसी व्यवस्थाओं को समाप्त करने की मांग रखी गई।
रैली में आदिवासी/सरना धर्मकोड के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। आदिवासी समाज की अलग धार्मिक पहचान से जुड़े इस मुद्दे को लंबे समय से विभिन्न संगठन उठाते रहे हैं।
हालांकि, रैली को लेकर आदिवासी संगठनों के बीच पूरी तरह एक राय नहीं रही। कुछ स्थानीय सरना और आदिवासी संगठनों ने महाजुटान का विरोध किया। विरोध करने वाले संगठनों की ओर से आयोजन पर चर्चा के प्रभाव या प्रायोजन का आरोप लगाया गया है।
मोरहाबादी मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के कारण रांची के आसपास के इलाकों में भीड़ और यातायात पर बहुत बुरा असर पड़ने की स्थिति बनी। रैली को लेकर प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए थे।
✍️Vishwajeet bhatt
Disclaimer
इस लेख में व्यक्त विचार, मत एवं विश्लेषण मूल लेखक के हैं। इसे केवल प्रकाशन हेतु संपादित किया गया है। विचारों, मतों या उनसे उत्पन्न परिणामों के लिए वेब पोर्टल अथवा प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होंगे।
देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलो करें।