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उत्तर प्रदेश

भाजपा का साथ छोड़ अन्य दलों का दामन थामने वाले राजनेताओं का कैसा रहा सियासी कॅरियर ?

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यूपी की सियासत में इन दिनों कुर्सी और पद को बनाए रखने के लिए तमाम बड़े नेता पार्टी से इस्तीफा देकर अन्य पार्टियों का दामन थामने में जुटे हुए हैं। पर अब सवाल उठने लगा है कि क्या आज जो नेता पार्टी का साथ छोड़ अन्य दलों का दामन थामने में जुटे हुए हैं उनका सियासी कॅरियर कितना सफल रहा है ?

Vijay Sankalp Yatra Uttarakhand
Uttar pradesh- bjp will hold sammelan in all 403 assembly
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UP Assembly Election 2022 : उत्तर प्रदेश में स्वामी प्रसाद मौर्य के योगी मंत्रिमण्डल से इस्तीफा देने के बाद से सियासी गलियारे में उन नेताओं के कॅरियर पर चर्चा शुरू हो गयी है जो भाजपा छोड़कर गए हैं। उनकी सफलता और असफलता पर लोग विमर्श कर रहे हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य से पहले बहराइच की पूर्व सांसद सावित्री बाई फूले, दिल्ली से सांसद उदित राज, शत्रुघ्न सिन्हा जैसे तमाम कद्दावर नेताओं की एक लंबी सूची है। ऐसे नेताओं पर भाजपा के भीतर भी चर्चा हो रही है।

भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने ट्वीट कर स्वामी प्रसाद मौर्य को घेरा

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने बुधवार को ट्वीट के जरिये नाम लिए बगैर स्वामी प्रसाद मौर्य पर हमला बोला है। उन्होंने पूर्व सांसद सावित्री बाई फूले का हवाला देकर कहा कि बहुत से नेता भाजपा को छोड़कर गये, लेकिन वह राजनीति में फलफूल नहीं पाए। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने ट्वीट कर कहा कि बहराइच की पूर्व सांसद सावित्री बाई फूले को भी यही गलतफहमी थी।

फूले को यकीन था कि 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें जो 4 लाख 32 हजार 392 मत मिले, उनके दम पर थे। उन्हें इस बात का यकीन था कि वह अपने दम पर चुनाव जीती हैं। बाद में वह भाजपा से अलग हुईं। फिर 2019 में कांग्रेस प्राइवेट लिमिटेड पार्टी से चुनाव लड़ीं। तब उन्हें मात्र 34 हजार 454 मत मिले। राकेश आगे लिखते हैं कि भाजपा छोड़कर जाने वाले के पास कुछ भी नहीं बचा है। इस दौरान भाजपा प्रवक्ता ने सभी प्रत्याशियों को मिले मत का आंकड़ा भी साझा किया है।

इनसे पहले यह नेता भी भाजपा छोड़कर गए

वहीं दूसरी विचारधारा से आए दिल्ली में भाजपा के टिकट से सांसद बने उदित राज ने भी पार्टी के साथ बगावत की। वह भाजपा छोड़कर जाने के बाद से कुछ अर्जित नहीं कर पाए। हालांकि उन्हें पूरे देश भर में मोदी और भाजपा विरोधी मंचों पर बोलने का अवसर जरूर मिल रहा है। पर राजनीती में वह सफल नहीं हो पाए। एक और नाम सावित्री बाई फूले का है। वह बहराइच से 2012 में भाजपा के टिकट पर विधायक बनीं।

इसके बाद पार्टी ने उन्हें मोदी लहर में 2014 का लोकसभा चुनाव लड़वाया। वह भारी मतों से विजयी रहीं। परन्तु दुःख की बात यह रही कि, उन्होंने भी भाजपा के साथ बगावत की। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने भाजपा से दूरी बनाई और भाजपा को धोखा दिया आज उन्हें भाजपा से दूरी बनाने के बाद अब एहसास हो गया है कि उनका सियासी कॅरियर पूरी तरह से खत्म हो गया। वहीं भाजपा के खाटी नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और उमा भारती जैसे नेता नाराज होकर भाजपा छोड़कर चले गये थे। बाद में उन नेताओं को भी अपने दल में वापसी करनी पड़ी।

 

 

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