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उत्तराखंड में  कांग्रेस ने सांसद की सांसद निधि पर उठाए सवाल

देश के विकास के लिए केंद्र सरकार की तरफ से सभी सांसदों को सांसद निधि दी जाती है। ताकि सांसद अपने अपने क्षेत्रों का विकास कर सकें। संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के पांच लोकसभा सदस्यों को 40 करोड़ रुपए जारी किए।

By Rakesh 

Updated Date

नई दिल्ली। देश के विकास के लिए केंद्र सरकार की तरफ से सभी सांसदों को सांसद निधि दी जाती है। ताकि सांसद अपने अपने क्षेत्रों का विकास कर सकें। संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के पांच लोकसभा सदस्यों को 40 करोड़ रुपए जारी किए। जिसमें से 30.80 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। लेकिन अभी 9.85 करोड़रुपए खर्च होना बाकी है।

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कोविड-19 महामारी की दुश्वारियां से उभरने के बाद केंद्र सरकार ने विकास कार्यों के लिए हर सांसद को 7 करोड़ से लेकर 9.50 करोड रुपए की निधि जारी की है । ब्याज समेत ये धनराशि करीब 40.66 करोड रुपए तक हो गई है । लेकिन खर्च करने के मामले में पांचों सांसदों में नैनीताल – उधम सिंह नगर के सांसद रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट का रिकॉर्ड बेहतर है। ब्याज समेत उन्हें जारी 7.04 करोड रुपए के सांसद निधि मिली।  जिसमें से 98.67  प्रतिशत खर्च हो चुका है।

पोर्टल पर हरिद्वार के सांसद डॉक्टर रमेश पोखरियाल को जारी सांसद निधि ब्याज समेत 7.5 करोड़ में से 70.46 प्रतिशत खर्च की गई है। वहीं अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा ने 9.50 करोड़ में से 80.60 प्रतिशत खर्च किया है। जबकि पौड़ी सांसद तीरथ सिंह रावत को जारी खर्च की दर पोर्टल पर एक 61.68% रही है।

वहीं टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह की बात करें तो उन्होंने 6.47 करोड़ में से सिर्फ 50% सांसद निधि जारी किया है। सांसदों की सांसद निधि खर्च करने की धीमी रफ्तार को लेकर अब बीजेपी भी उनके बचाव की मुद्रा में आ गई है। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता वीरेंद्र बिष्ट की माने तो कुछ कामों वक्त लगता है।

कुछ विकास कार्यों के प्रस्ताव जिला प्रशासन के पास लंबित है .. जिसकी वजह से विकास कार्यों में निधि खर्च नहीं हो पाई है। तो वहीं इसको लेकर कांग्रेस बीजेपी के नेताओं पर गंभीर आरोप लगा रही है।उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव के तैयारी शुरू कर चुकी हैं। सियासी दलों में सत्ता पक्ष बीजेपी के चिंता का विषय भी यही है कि। जिनके लिए पूरी तैयारी हो गई है उनका रिपोर्ट कार्ड ही संतोषजनक नहीं है । लिहाजा बीजेपी को डबल तैयारी के साथ लोकसभा चुनाव की तैयारी करनी पड़ेगी ।

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ताकि जनता को भरोसा दिलाया जा सके की उनके जनप्रतिनिधि अन्य दलों से बेहतर है और उनके विकास के लिए कार्य करेंगे। लेकिन इस कड़ी में बीजेपी के नेता कितने कामयाब होते हैं। ये तो अब आने वाला वक्त ही बताएगा।

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