1. हिन्दी समाचार
  2. क्षेत्रीय
  3. Judiciary Under Fire: अगले CJI का बड़ा बयान – “जैसे-तैसे चल रहे हैं हम…”

Judiciary Under Fire: अगले CJI का बड़ा बयान – “जैसे-तैसे चल रहे हैं हम…”

देश की न्यायपालिका पर हाल के दिनों में हो रहे राजनीतिक हमलों के बीच सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इस पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पहले से ही अनेक दबावों का सामना कर रही है, और अब उस पर लगातार हो रहे हमले स्थिति को और मुश्किल बना रहे हैं। यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब जजों की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बहस तेज हो गई है।

By  

Updated Date

न्यायपालिका पर हमला: अगले CJI बोले – “जैसे-तैसे चल रहे हैं हम”

नई दिल्ली:
देश की न्यायपालिका पर लगातार हो रहे राजनीतिक और सार्वजनिक हमलों के बीच सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) का बयान सामने आया है। इस बयान में उन्होंने न्यायाधीशों पर हो रहे दबाव और लगातार बढ़ रही आलोचनाओं पर चिंता जाहिर की है।

पढ़ें :- Bihar News : SIR को लेकर CM सम्राट चौधरी का विपक्ष पर हमला, कहा-आरोपों के बजाय तथ्य के साथ आएं

किसी पब्लिक फोरम पर दिए गए बयान में उन्होंने कहा,

“As it is, we are struggling… हम जैसे-तैसे अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं। न्यायपालिका पर अतिरिक्त हमलों से सिस्टम और दबाव में आ जाता है।”


न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर चिंता

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश के इस बयान ने न्यायिक स्वतंत्रता (Judicial Independence) को लेकर छिड़ी बहस को और भी गंभीर बना दिया है। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब संसद से लेकर सोशल मीडिया तक, न्यायपालिका की भ्रमित छवि पेश करने की कोशिशें हो रही हैं।


राजनीतिक हमलों की बौछार

पिछले कुछ समय में विभिन्न राजनीतिक दलों, खासकर विपक्षी नेताओं द्वारा न्यायिक फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं। कभी किसी विशेष मामले में निर्णय को पक्षपाती कहा जाता है, तो कभी न्यायधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई जाती है। ऐसे में अगला CJI का यह बयान उनके भीतर की व्यथा को दिखाता है।

पढ़ें :- प्रवेश वर्मा के थप्पड़ कांड पर राहुल गांधी बोले- भाजपा को वोटर से डर लगना बंद हो गया है

उन्होंने यह भी कहा कि जजों को भी “मानव” समझा जाए।

“हम भी इंसान हैं, हम पर भी आलोचना और विवाद असर डालते हैं।”


न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा जरूरी

CJI ने साफ कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की गरिमा और उसकी स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। अगर उस पर लगातार हमले होते रहेंगे, तो आम आदमी का न्याय पर विश्वास डगमगाने लगेगा।

उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वो कोर्ट की कार्यप्रणाली को समझे और न्यायिक फैसलों को पूर्वाग्रह के बिना पेश करे।


जजों पर पर्सनल हमले भी बढ़े

हाल के कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों में सुप्रीम कोर्ट के जजों पर व्यक्तिगत टिप्पणियां भी सामने आई हैं। यह ट्रेंड न केवल असंवैधानिक है बल्कि खतरनाक भी है, क्योंकि यह न्यायाधीशों की निष्पक्षता पर सीधा वार करता है।

पढ़ें :- 'एक संवैधानिक संस्था पूरी तरह कार्यपालिका के नियंत्रण में...', चुनाव आयोग को लेकर ओवैसी का बयान

CJI ने कहा कि

“हमारी चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए। न्यायिक पद की गरिमा हमें जवाबी हमला करने की इजाज़त नहीं देती।”


न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका: नया टकराव?

वर्तमान हालात में ऐसा लग रहा है जैसे कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच टकराव की रेखाएं खिंचती जा रही हैं। कॉलेजियम सिस्टम, न्यायिक नियुक्ति और संवैधानिक मामलों पर राजनीतिक टिप्पणियां स्थिति को और उलझा रही हैं।

CJI का यह बयान उसी तनाव की अभिव्यक्ति के तौर पर देखा जा रहा है।


जनता का न्याय पर भरोसा ज़रूरी

CJI ने कहा कि भारत की आम जनता आज भी न्यायपालिका को सबसे ज्यादा भरोसेमंद संस्थान मानती है। ऐसे में यह ज़िम्मेदारी भी न्यायाधीशों की है कि वे अपने फैसलों और कार्यप्रणाली से उस विश्वास को कायम रखें।


निष्कर्ष

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाना या हमला करना किसी भी रूप में उचित नहीं है। अगला CJI का यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी है। अब यह वक्त है जब सभी पक्ष—राजनीतिक, सामाजिक और मीडिया—को न्यायपालिका के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना होगा।

पढ़ें :- Asian Games 2026 : डेकाथलॉन में ब्रॉन्ज के साथ तेजस्विन शंकर ने रचा इतिहास, इवेंट में दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष बने

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook, YouTube और Twitter पर फॉलो करे...
Booking.com
Booking.com