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माइनिंग लीज मामले में मुख्यमंत्री ने हाई कोर्ट में दाखिल किया जवाब

अधिवक्ता राजीव कुमार ने इस बारे में बताया कि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खनन विभाग के क्रियाकलाप पर मौखिक टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि माइनिंग डिपार्टमेंट में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

By Akash Singh 
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रांची : झारखंड हाई कोर्ट में शुक्रवार को माइनिंग लीज मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल किया गया। मुख्यमंत्री की ओर से अधिवक्ता ने झारखंड हाई कोर्ट के समक्ष जवाब दाखिल किया है। शुक्रवार को इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच में सुनवाई होनी थी लेकिन सुनवाई टल गई। अगली सुनवाई की तिथि तय नहीं हो पाई है।

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अधिवक्ता ने अदालत में मेंशन दाखिल कर यह जानकारी दी कि जिस मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को व्यक्तिगत रूप से नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है उस मामले में हेमंत सोरेन की ओर से वे अदालत में पक्ष रखेंगे। अदालत ने अधिवक्ता के द्वारा किये गये आग्रह को स्वीकार कर लिया है।

दो सप्ताह में दायर करना था एफिडेविट

उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई के दौरान माइनिंग लीज मामले में दायर जनहित याचिका में झारखंड हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था। अदालत ने दो सप्ताह के भीतर एफिडेविट दायर करने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को जानकारी दी थी कि रांची डीसी छवि रंजन ने उन्हें अपने घर पर बुलाकर डराया। इस पर अदालत ने अधिवक्ता से कहा था कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है।

इस मामले में मुख्यमंत्री समेत अन्य उच्च पदस्थ लोगों को पार्टी बनाया गया है। अदालत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत सभी को नोटिस जारी किया है। अधिवक्ता राजीव कुमार ने इस बारे में बताया कि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खनन विभाग के क्रियाकलाप पर मौखिक टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि माइनिंग डिपार्टमेंट में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

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शिव शंकर शर्मा ने दाखिल की याचिका

इस संबंध में शिव शंकर शर्मा की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। पिछली सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता राजीव कुमार ने अदालत को बताया था कि मुख्यमंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए रांची के अनगड़ा में पत्थर खनन की लीज आवंटित कर दी गई। यह संविधान के अनुच्छेद 191 का उल्लंघन है। लाभ के पद पर रहते हुए इस तरह का व्यवसाय नहीं कर सकते हैं। ऐसा करने पर उस व्यक्ति की सदस्यता समाप्त किए जाने का प्रावधान है।

इस पर सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा था कि वर्ष 2008 में हेमंत सोरेन को खनन पट्टा मिला था। वर्ष 2018 में लीज समाप्त हो गया। इसके बाद नवीकरण के लिए आवेदन दिया था। शर्तों को पूरा नहीं करने पर लीज नवीकरण रद कर दिया गया। सितंबर 2021 में विभाग की ओर से फिर से लीज आवंटित कर दी गई। फरवरी 2022 में लीज सरेंडर कर दिया गया।

रघुवर दास ने किया था खुलासा

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने नाम से खनन पट्टा लिया है। वह मुख्यमंत्री हाेने के साथ-साथ खनन विभाग के मंत्री भी हैं। भाजपा एक प्रतिनिधिमंडल ने इसकी शिकायत राज्यपाल रमेश बैस से की थी। राज्यपाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेज दी। इसके बाद चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव से रिपार्ट मांग ली।

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