Jharkhand : झारखंड के शहरी इलाकों में अब मांस, मछली और अंडे का कारोबार करना पहले से ज्यादा नियमबद्ध होगा।✍️Vishwajeet bhatt
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Jharkhand : झारखंड के शहरी इलाकों में अब मांस, मछली और अंडे का कारोबार करना पहले से ज्यादा नियमबद्ध होगा। नगर निकाय की NOC यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना ऐसी दुकानें चलाना मुश्किल होगा। नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में ‘झारखंड नगरपालिका विनियम, 2026’ अधिसूचित किया है। नया नियम मांस की दुकान खोलने के साथ-साथ मीट प्रोसेसिंग, स्टोरेज और बिक्री से जुड़े कारोबार पर भी लागू होगा। यानी पुरानी दुकानों के साथ नई दुकान खोलने वालों को भी निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
दुकानदारों को अपने संबंधित नगर निकाय में NOC के लिए आवेदन करना होगा। इसके लिए ₹100 प्रोसेसिंग फीस निर्धारित की गई है। आवेदन मिलने के बाद नगर निकाय की अधिकृत टीम दुकान और उसके आसपास की व्यवस्था का निरीक्षण करेगी।
निरीक्षण के दौरान सिर्फ दुकान की लोकेशन ही नहीं, बल्कि कई बुनियादी सुविधाओं को भी देखा जाएगा। जैसे, साफ-सफाई की व्यवस्था, पानी की उपलब्धता, पर्याप्त वेंटिलेशन, जल निकासी यानी ड्रेनेज और कचरा निस्तारण की व्यवस्था आदि। इन मानकों पर खरा उतरना NOC की प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगा।
नए नियमों में मांस को खुले में प्रदर्शित करने या बेचने पर रोक रहेगी। दुकानदारों को मांस को शीशे के काउंटर में या ढककर रखना होगा। इसका मकसद साफ-सफाई बनाए रखने के साथ मांस को धूल, गंदगी और बाहरी प्रदूषण से बचाना है। नगरपालिका द्वारा निर्धारित आधिकारिक स्लॉटरहाउस यानी वधशाला के बाहर पशु काटने की अनुमति नहीं होगी। इसका मतलब है कि दुकान के अंदर या किसी अन्य अनधिकृत जगह पर पशु वध करने पर कार्रवाई हो सकती है।
सिर्फ नगर निकाय की NOC लेना ही पर्याप्त नहीं होगा। कारोबारियों के पास FSSAI का वैध लाइसेंस और ट्रेड लाइसेंस भी होना जरूरी होगा। नियमों के मुताबिक FSSAI लाइसेंस की प्रक्रिया से पहले नगर निकाय की NOC लेना आवश्यक होगा।
धनबाद और देवघर समेत कुछ नगर निकायों ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए आदेश जारी किए हैं। संबंधित दुकानदारों को नियमों का पालन करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। इसके बाद बिना NOC संचालित होने वाली दुकानों पर नगर निकाय कार्रवाई कर सकता है। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर जब्ती समेत अन्य कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।
नए नियमों से मीट और अन्य संबंधित खाद्य कारोबार में साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन, वेंटिलेशन और लाइसेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं पर जोर बढ़ेगा। दुकानदारों के लिए इसका मतलब अतिरिक्त अनुपालन है, जबकि प्रशासन के लिए यह शहरी क्षेत्रों में ऐसे कारोबार को ज्यादा व्यवस्थित और नियंत्रित करने की कोशिश है।
जिन दुकानदारों के पास जरूरी दस्तावेज या NOC नहीं है, उन्हें अपने संबंधित नगर निकाय से नियमों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी लेकर समय रहते आवेदन करना होगा। यानी अब झारखंड के शहरी क्षेत्रों में मीट-मछली-अंडे का कारोबार सिर्फ दुकान खोलने तक सीमित नहीं रहेगा, NOC, लाइसेंस और तय मानकों का पालन भी जरूरी होगा।
✍️Vishwajeet bhatt
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