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International news:चीन द्वारा आयोजित हिंद महासागर फोरम की बैठक,मालदीव और ऑस्ट्रेलिया ने हिस्सा लेने से किया इनकार

चीन द्वारा आयोजित हिंद महासागर फोरम की बैठक में मालदीव के बाद ऑस्ट्रेलिया ने भी हिस्सा लेने से इनकार कर दिया,चीन को हिंद महासागर फोरम की बैठक को लेकर जोर का झटका लगा है,यह बैठक चीन के नेतृत्व में 21नवंबर को हुई थी।

By इंडिया वॉइस 

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China News:चीन द्वारा आयोजित हिंद महासागर फोरम की बैठक में मालदीव के बाद ऑस्ट्रेलिया ने भी हिस्सा लेने से इनकार कर दिया,चीन को हिंद महासागर फोरम की बैठक को लेकर जोर का झटका लगा है,यह बैठक चीन के नेतृत्व में 21नवंबर को हुई थी, भारत में ऑस्ट्रेलिया के राजदूत बैरी ओ’फैरेल ने चीन को ट्वीट किया- मीडिया में चल रही खबरों के उलट बता दें, ऑस्ट्रेलिया के किसी भी अधिकारी ने हिंद महासागर फोरम की बैठक में हिस्सा नहीं लिया

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हिंद महासागर फोरम की बैठक चीन की सहयोगी एजेंसी ने आयोजित की थी,इस बैठक में मालदीव के विदेश मंत्रालय ने 20 नवंबर को हिंद महासागर फोरम की बैठक में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था,मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद वाहिद हसन और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम केविन रूड ने वर्चुअली हिस्सा लिया था, लेकिन दोनों देशों से आधिकारिक तौर पर किसी अधिकारी ने हिस्सा नहीं लिया,अपने बयान में मंत्रालय ने कहा था कि मालदीव की सरकार ने बताई गई बैठक में हिस्सा नहीं लिया. सरकार ने अपना फैसला 15 नवंबर को चीन के उच्चायोग को भी बता दिया था.

बता दें, चाइना इंटरनेशनल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन एजेंसी (CIDCA) ने एक संयुक्त प्रेस रिलीज जारी कर कहा था कि मालदीव 21 नवंबर को होने जा रही बैठक में हिस्ला ले रहा है.मालदीव ने कहा कि बैठक में किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत या किसी समूह के व्यक्तिगत रूप से शामिल होने पर यह नहीं कहा जा सकता कि उसमें सरकार ने हिस्सा लिया. मालदीव के संविधान के मुताबिक, केवल देश के राष्ट्रपति को ही विदेश नीति और विदेशी बैठकें करने का अधिकार है. आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय बैठकें केवल कूटनीतिक स्रोतों के जरिये होती हैं. इसलिए हिंद महासागर फोरम की बैठक में मालदीव का कोई अधिकारी आधिकारिक रूप से सरकार की तरफ से शामिल नहीं हुआ.

गौरतलब है कि दक्षिण-चीन सागर के बढ़ते विवाद के बीच कई देशों ने हिंद और प्रशांत महासागर का रुख किया है. इस तरह की परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक मजबूत नीति बनाने पर जोर देने की जरूरत बताई जा रही है. बता दें, हाल ही में अमेरिका ने अपनी बहुप्रतीक्षित इंडो-पैसिफिक नीति की घोषणा की. इसमें चुनौतियों से मिलकर लड़ने के लिए संयुक्त प्रयास पर जोर दिया गया है.

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