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झारखंड में स्वामित्व योजना के विरोध में हजारों आदिवासी पहुंचे तोरपा प्रखंड कार्यालय

उल्लेखनीय है कि इन दिनों लगातार आसपास के सैकड़ों ग्रामीण प्रखंड मुख्यालय पहुंच स्वामित्व योजना का विरोध करते हुए ड्रोन सर्वे को बंद करने की मांग कर रहे हैं।

By Akash Singh 
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खूंटी : केंद्र प्रायोजित स्वामित्व योजना का तोरपा प्रखंड के आदिवासियों का विरोध जारी है। सोमवार को स्वामित्व योजना का विरोध करने आये ग्रामसभा के सदस्यों को अनुमंडल पदाधिकारी सैयद रियाज अहमद ने समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। अंत में एसडीएम बीच में ही छोड़ कर चले गये।

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उल्लेखनीय है कि इन दिनों लगातार आसपास के सैकड़ों ग्रामीण प्रखंड मुख्यालय पहुंच स्वामित्व योजना का विरोध करते हुए ड्रोन सर्वे को बंद करने की मांग कर रहे हैं। इसे देखते हुए सोमवार को भी प्रखंड के कई पंचायतों के ग्रामीण प्रखंड मुख्यालय पहुंचे और प्रखंड मुख्यालय के पास स्वामित्व योजना का विरोध करने लगे।अधिकतर ग्रामीण हाथों में तख्तियां लिए नारेबाजी कर रहे थे। गामीण ग्राम सभा के अधिकारों का हनन करना बंद करो, संपत्ति कार्ड हमें नहीं चाहिए सहित कई नारे लगा रहे थे।

ड्रान सर्वे का विरोध कर रहे रोहित सुरीन, तुरतन तोपनो, सुदर्शन भेंगरा, हादु तोपनो, बेनिदिक नवरंगी, दयाल कोनगाडी सहित 21 ग्राम सभा के ग्राम प्रधानों का कहना है कि जब तक स्वामित्व योजना की संपूर्ण जानकारी नहीं मिल जाती है, तब तक ड्रोन सर्वे गांवों में नही करने देंगे। कर्रा प्रखंड के मोड़या मधुकम के सलिल कोंगाडी का कहना है कि अंचल व जिला प्रशासन कहता है कि केवल मकान-भवन का ही सर्वे कर कार्ड दिया जाएगा, लेकिन सरकार द्वारा एक पत्र निकाला गया है, जिसमें एक लाइन में लिखा हुआ है कि ग्रामीण इलाकों में जमीन का सर्वे करना है, तो ऐसा क्यों पहले शहर का सर्वे न कर ग्रामीण इलाकों में क्यों किया जा रहा है।

इस दौरान उपस्थित ग्रामीणों को एसडीएम रियाज अहमद ने समझाते हुए कहा कि कुछ चुनींदा लोगों के बहकावे में आकर भोलेभाले ग्रामीण लाभकारी योजना से वंचित हो रहे है। ड्रोन सर्वे से पूर्व हर गांव में जाकर ग्राम सभा की जा रही है और उस जगह पर ग्रामीणों को स्वामित्व योजना के बारे में पूर्ण जानकारी दी जा रही है। साथ ही आपके सारे सवालों के जवाब भी दिया जाता है। यह सर्वे किसी की जमीन या भूमि को कब्जा नहीं करने के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि आपके मकानों का सर्वे किया जा रहा है। बाद में मकान के मालिक को स्वामित्व कार्ड दिया जायेगा।

इधर, इस बारे में ग्रामीणों का कहना है कि ड्रोन सर्वे पहले कर लिया जाता और बाद में ग्रामी सभा की जाती है, जबकि निर्देश है कि पहले ग्राम सभा हो और उसीसहमति के बाद ही सर्वे हो। झारखंड का अधिकांश हिस्सा पांचवीं अनुसूची क्षेत्र, सीएनटी- एसपीटी एक्ट और विल्किनशन रूल के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों कहते हैं कि हमें स्वामित्व कार्ड की आवश्यकता नहीं है। जल, जंगल, जमीन हमारा है। हम अपने घर के लिए स्वामित्व कार्ड सरकार से क्यों लेंगे? सरकार द्वारा स्वामित्व योजना के नाम पर आदिवासी जमीन पर गैरकानूनी रूप से कब्जाधारियों को मान्यता देने की साजिश की जा रही है। इससे पूर्व एसडीएम ने प्रखंड मुख्यालय के सभागार में मुखिया व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में मुखिया से कहा कि स्वामित्व योजना आनेवाले चुनाव में आपके बहुत काम आनेवाला है। इस सर्वे से जो नक्शा बनेगा, उससे आसानी से गांव की योजना का क्रियान्वयन किया जा सकता है। मौके पर सीओ सच्चिदानंद वर्मा और बीडीओ दयानंद कारजी उपस्थित थे।

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