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क्या है भगवान जगन्नाथ के सोने की कुल्हाड़ी का सच ?

क्या आपको पता है सोने की कुल्हाड़ी का सच क्या है। जो भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में लकड़ियों को काटने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

By Avnish 

Updated Date

नई दिल्ली हर वर्ष आषाढ़ महीने में उड़ीसा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है। यह रथयात्रा देशभर में प्रसिद्ध है। पुरी की यात्रा देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं।

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इसी साल 20 जून को जगन्नाथ रथयात्रा का पर्व मनाया जाना है। इसकी तैयारी कई महीने पहले से शुरू हो जाती है। जानकारी यह भी है कि जिन लकड़ियों का इस्तेमाल इस रथ को बनाने के लिए किया जाता है, उसे सोने की कुल्हाड़ी से काटा जाता है।

रथ बनाने का नियम क्या है?

अगर इस रथ को बनाने की बात की जाए तो पूरे दो महीने तक का समय लगता है। इसके लिए कुछ नियम ऐसे हैं जिनका पालन करना होता है । रथ बनाने के लिए सबसे पहला काम होता है कि आपको लकड़ियों को चुनना होता है। जरूरी बात यह है कि कोई भी लकड़ी ऐसी ना हो जो कि कटी हुई हो या फिर उसमें कील लगी हुई हो।

इन लकड़ियों का इस्तेमाल आप रथ बनाने के लिए नहीं कर सकते हैं। यह रथ एकदम शुद्ध लकड़ियों से बना होता है। खास बात तो यह है कि जब तक यह रथ बनकर पूरी तरीके से तैयार नहीं हो जाता है तब तक कारीगर वहीं रहते हैं और अपना काम करते रहते हैं।  2 महीने का वक्त लगता है। इस दौरान कारीगर को सारे नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

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जरूरी बात यह भी है कि वहां रहने वाले कारीगर एक ही वक्त का खाना खाते हैं। वह भी सिर्फ शाकाहारी। उन्हें सिर्फ सादा भोजन ही खाना होता है। सिर्फ इतना ही नहीं यदि किसी कारीगर के घर में कोई हादसा या अनहोनी हो जाती है तो उस कारीगर पर अगर सतूक या पातक लग जाता है तो फिर उस कारीगर को रथ निर्माण से हटा दिया जाता है।

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