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‘24’ में नारी वंदन ! बीजेपी ने 2012 में टिहरी गढ़वाल सीट से महिला को दिया था टिकट

महिला आरक्षण विधेयक पास होने के बाद राज्य में महिलाएं भले ही उत्साहित नजर आ रहीं हो कि उन्हें अब राजनीति में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। लेकिन चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही दल महिलाओं को चुनाव मैदान में टिकट देने के मामले में कंजूसी करते हुए नजर आए हैं। केंद्र में एनडीए सरकार ने भले ही 33% महिला आरक्षण विधेयक को अब कानून का स्वरूप दे दिया हो।

By Rakesh 

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देहरादून। महिला आरक्षण विधेयक पास होने के बाद राज्य में महिलाएं भले ही उत्साहित नजर आ रहीं हो कि उन्हें अब राजनीति में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। लेकिन चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही दल महिलाओं को चुनाव मैदान में टिकट देने के मामले में कंजूसी करते हुए नजर आए हैं। केंद्र में एनडीए सरकार ने भले ही 33% महिला आरक्षण विधेयक को अब कानून का स्वरूप दे दिया हो।

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लेकिन राज्य में अभी भी महिलाओं को राजनीति में बराबरी का दर्जा नहीं मिल पाया है। और यह हम नहीं बल्कि राज्य में सियासी दलों के द्वारा चुनावों में महिलाओं को दिए गए टिकट के आंकड़े बता रहे हैं। उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव में महिलाओं को टिकट देने की परंपरा बीजेपी ने 2012 में टिहरी गढ़वाल सीट के उप चुनाव से शुरू की।

2012 के बाद 2014 और 2019 में भी भाजपा टिहरी लोकसभा सीट पर ही महिला को टिकट दिया। जबकि कांग्रेस ने महिलाओं को टिकट 2014 में हरिद्वार लोकसभा सीट पर श्रीमती रेणुका रावत से किया। लेकिन कांग्रेस उसके बाद फिर महिलाओं को भूल गई। अगर हम विधानसभा चुनाव की बात करते हैं तो विधानसभा चुनाव में भी 2002 से लेकर अब तक कांग्रेस ने और बीजेपी ने लगभग बराबर ही महिलाओं को टिकट दिए हैं।लेकिन पुरुषों कि तुलना में यह आंकड़ा भी बहुत कम नजर आता है।

2002 में राज्य की 70 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 8 सीटों पर ही महिलाओं की टिकट दिए जबकि भाजपा 7 सीटों तक सिमट का रह गई। 2007 के दूसरे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 7 महिलाओं को टिकट दिया जबकि भाजपा ने 8 महिलाओं को टिकट दिया,  2012 में कांग्रेस ने 10 महिलाओं को टिकट दिया जबकि भाजपा ने 6 महिलाओं को टिकट दिया , 2017 में कांग्रेस ने 8 महिलाओं को तो बीजेपी ने चार महिलाओं को टिकट दिया,  2022 में कांग्रेस ने पांच को भाजपा ने 6 महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा।

लेकिन 70 विधानसभा वाले राज्य में यह आंकड़ा भी महिला आरक्षण को सर्थक करता हुआ नजर नहीं आता है और अब लोकसभा चुनाव 2024 में भी कुछ परिदृश्य वैसा ही नजर आ रहा है जैसे पिछले चुनाव में नजर आया था।

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अब इसपर बीजेपी कांग्रेस की अपनी अलग दलील है। वैसे ये बात किसी से छिपी नहीं है कि उत्तराखंड आंदोलन में उत्तराखंडी मात्रशक्ति की ही बदौलत ही देश के नक्शे पर उत्तराखंड अलग राज्य बनकर उभरा । मगर आज तक राज्य की महिलाओं को राजनीतिक हिस्सेदारी में उन्हें हक नहीं मिला। ऐसे में सवाल ये कि महिलाओँ को कब मिलेगी आधी हिस्सेदारी ये यक्ष प्रश्न कल भी था और आज भी है।

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