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WHO Warned : कोरोना थमा नहीं, मारबर्ग वायरस का खतरा मंडराया, जानें क्या होता है मारबर्ग वायरस?

CDC विशेषज्ञों का कहना है कि मारबर्ग वायरस के कारण होने वाले रोग का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है। इलाज के तौर पर रोगी में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करने, ऑक्सीजन और रक्तचार की स्थिति को नियंत्रित रखने और खून की कमी ना होने देने पर जोर दिया जाता है।

By इंडिया वॉइस 
Updated Date

जेनेवा, 19 जुलाई। पूरी दुनिया अभी भी कोरोना महामारी के प्रकोप से जूझ ही रही थी कि अब मारबर्ग वायरस का खतरा मंडराने लगा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)ने इसे लेकर चेतावनी जारी करते हुए हालात बेकाबू होने की संभावना भी जताई है।

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बीते 2 सालों से दुनिया कोरोना वायरस के प्रकोप से पूरी तरह उबरी भी नहीं थी कि अब एक नए वायरस मारबर्ग की आहट ने लोगों के सकते में डाल दिया है। मारबर्ग वायरस के कारण घाना में पिछले महीने 2 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। ये दोनों लोग मारबर्ग वायरस से संक्रमित पाए गए थे। अब प्रशासन ने दोनों के संपर्क में आने वाले लोगों को एतिहातन आइसोलेट कर दिया है।

मारबर्ग वायरस का खतरा 88 फीसदी

WHO ने भी मारबर्ग वायरस को लेकर चेतावनी जारी की है। WHO ने कहा कि अगर मारबर्ग वायरस को लेकर तुरंत जागरुकता के साथ सावधानी नहीं बरती गई तो स्थिति बिगड़ सकती है। WHO ने साफ कहा कि मारबर्ग वायरस का प्रसार हुआ तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। जानकारों के मुताबिक मारबर्ग वायरस के कारण मारबर्ग वायरस डिजीज (MVD) का खतरा होता है और इसकी मृत्युदर 88 फीसदी से अधिक हो सकती है।

मारबर्ग वायरस के बारे में जानिए

साल 1967 में जर्मनी के मारबर्ग और फ्रैंकफर्ट में सबसे पहले इस वायरस का प्रकोप देखा गया था। ये वायरस भी इबोला परिवार का ही सदस्य है। दोनों बीमारी दुर्लभ हैं और उच्च मृत्यु दर के साथ तेजी से प्रकोप का कारण बन सकती है। कोरोना की ही तरह ये भी चमगादड़ों के स्रोत के कारण होने वाली बीमारी है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) के विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित जानवर से इंसानों में वायरस के क्रॉसओवर के बाद इसका एक से दूसरे व्यक्ति में संचरण हो सकता है।

जानें मारबर्ग वायरस डिजीज के लक्षण?

CDC के मुताबिक संक्रमितों के संपर्क में आने के बाद इसका इनक्यूबेशन पीरियड 2-21 दिनों को होता है। इनक्यूबेशन पीरियड का मतलब वायरस से पीड़ित इंसान में लक्षण आने में लगने वाला समय है। इसमें संक्रमितों में बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द और मायलगिया जैसे लक्षण दिख सकते हैं। समय पर पहचान और उपचार ना होने पर लक्षणों के गंभीर रूप लेने का खतरा रहता है जिसमें पीलिया, अग्न्याशय की सूजन, तेजी से वजन कम होने, झटके आने, लिवर फेलियर और बड़े पैमाने पर रक्तस्राव का खतरा रहता है। MVD का निदान थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसके कई लक्षण अन्य संक्रामक रोगों जैसे मलेरिया या टाइफाइड बुखार या वायरल हेमेरेजिक फीवर के समान होते हैं।

कैसे फैलता है ये संक्रमण?

विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित व्यक्ति के रक्त या शरीर के तरल पदार्थ (मूत्र, मल, उल्टी, लार, पसीना, स्तन का दूध और वीर्य) के संपर्क में आने से इसका संक्रमण अन्य लोगों में होने का जोखिम होता है। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि संक्रमित के कपड़े, बिस्तर और चिकित्सा उपकरण के प्रयोग से भी संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। विशेषज्ञ संक्रमित लोगों से यौन संबंध रखने को मना करते हैं इससे दूसरे के संक्रमित होने का खतरा अधिक रहता है।

मारबर्ग वायरस डिजीज का इलाज और बचाव

CDC विशेषज्ञों का कहना है कि मारबर्ग वायरस के कारण होने वाले रोग का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है। इलाज के तौर पर रोगी में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करने, ऑक्सीजन और रक्तचार की स्थिति को नियंत्रित रखने और खून की कमी ना होने देने पर जोर दिया जाता है। MVD के खतरे से बचाव के लिए समय रहते इसके लक्षणों का निदान किया जाना सबसे जरूरी है। रोगी के साथ सीधे शारीरिक संपर्क से बचना चाहिए। अगर आप प्रभावित क्षेत्र में रह रहे हैं तो सावधानियों में सुरक्षात्मक गाउन, दस्ताने और मास्क पहनना जरूरी माना जाता है। संक्रमित व्यक्ति को सख्त क्वारंटीन में रखते हुए उसके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाली चीजों के उचित रखरखाव को ध्यान में रखकर संक्रमण बढ़ने के खतरे को रोका जा सकता है। मारबर्ग वायरस डिजीज के लिए ना तो अब तक कोई विशिष्ट इलाज है और ना ही बचाव के लिए वैक्सीन।

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