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टिकट बटवारे के बाद अब रूठे नेताओं को मानने में जुटी भाजपा और कांग्रेस, पढ़ें क्या है पूरा मामला ?

भाजपा और कांग्रेस को इन दिनों डर सताने लगा है कि पार्टी द्वारा टिकट ना दिए जाने से नाराज नेता आगामी चुनाव में पूरा खेल बिगाड़ सकते हैं। यही कारण है कि अब दोनों पार्टियां अपने रूठे नेताओं को मनाने में लग गई हैं।

By Ujjawal Mishra 
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Uttarakhand Assembly Election 2022 : प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए लगभग सभी पार्टियों ने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। जिन नेताओं को अपने मन मुताबिक सीट मिली है वो तो खुश हैं। पर जिन नेताओं का टिकट पार्टी ने इस बार काट दिया है वो पार्टी से इस कदर नाराज बैठे हैं कि आने वाले चुनाव में खेल भी बिगाड़ सकते हैं। यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों राजनीतिक पार्टियां इन दिनों टिकट बटवारे के बाद अपने रूठे नेताओं को मनाने में जुटी हुई हैं।

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14 फरवरी को होना है विधानसभा चुनाव 

दरअसल उत्तराखंड में 14 फरवरी को चुनाव होना है ऐसे में चुनाव से ठीक पहले भाजपा और कांग्रेस को डर सताने लगा है कि चुनाव में टिकट ना मिलने के कारण उनके नेता पार्टी का खेल बिगाड़ सकते हैं। चुनाव में सारे समीकरण ध्वस्त ना हो जाए इसके लिए भाजपा और कांग्रेस की एक टीम रूठे नेताओं को मनाने और अपने पाले में रखने की कोशिश में जुटी है। जानकारी के मुताबिक स्थिति ऐसी है कि कांग्रेस पार्टी रूठे नेताओं को मनाने के लिए नामांकन दाखिल करने से पहले तक उम्मीदवारों के सीटों में बदलाव कर रही है।

बगावत के बाद से बदली गई हरीश रावत की सीट  

कांग्रेस पार्टी के महासचिव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को पहले रामनगर सीट से उम्मीदवार घोषित किया गया था। जिसको लेकर कुछ नेता बगावत पर उतर गए थे। अब उन नेताओं के बगावत को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने हरीश रावत को लालकुआं से चुनावी मैदान में उतारा है। बता दें कि प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत के बागी तेवर को देखते हुए हरीश रावत को अब लालकुआं से उम्मीदवार घोषित किया है और असंतुष्ट नेताओं को मनाने में सफल हुई है।

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इसके आलावा दो अन्य उम्मीदवारों के सीटों में भी हुआ बदलाव 

हालांकि रणजीत रावत के बगावत को देखते हुए हरीश रावत की सीट जरूर बदली गई पर पार्टी ने रणजीत रावत को भी रामनगर से टिकट नहीं दिया है। बल्कि पार्टी ने उन्हें उनके पुराने सीट से ही उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा कांग्रेस ने अन्य दी सीटों पर भी उम्मीदवारों में फेरबदल किया है। जिसमें डोईवाला से मोहित उनियाल की जगह कांग्रेस ने अब गौरव चौधरी को टिकट दिया है। इसके अलावा ज्वालापुर सीट से बरखा रानी की जगह रवि बहादुर को उम्मीदवार बनाया है।

बागी नेताओं को मनाने के लिए भाजपा ने भी झोंकी ताकत

ऐसा नहीं है कि बगावत के सुर सिर्फ कांग्रेस में ही देखने की मिल रहा है। कांग्रेस की तरह भाजपा में भी इन दिनों बड़े स्तर पर टिकट ना मिलने के कारण नेताओं ने बगावत करना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि भाजपा ने भी अपने नेताओं को मनाने की कोशिशें तेज कर दी है।जानकारी के मुताबिक अल्मोडा से मौजूदा विधायक और राज्य विधानसभा में उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान इन दिनों कैलाश वर्मा को प्रत्याशी बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे थे।

उन्होंने बगावत का सुर अलापना शुरू कर दिया था पर पार्टी नेताओं के द्वारा मनाए जाने के बाद अब वह नरम पड़ने लगे हैं। उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि वो भाजपा से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। पर अब जब पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उनको मनाने की कोशिश की तो अब उनका बयान आया है कि उन्होंने जो कुछ भी बोला गुस्से में बोला। उन्होंने कहा कि मैं पिछले 40 साल से भाजपा से जुड़ा हुआ हूं और हमेशा पार्टी के लिए ही काम करूंगा।

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रुद्रपुर से भाजपा विधायक ने दिया इस्तीफ़ा 

इसके अलावा भाजपा से नाराज चल रही थराली विधानसभा क्षेत्र की विधायक मुन्नी देवी सिंह को भी मनाने में भाजपा को कामयाबी मिली है। बता दें कि इन्हें मनाने के लिए खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और तीरथ सिंह रावत जुटे हुए थे। वहीं रुद्रपुर से विधायक राजकुमार ठुकराल भी टिकट काटे जाने को लेकर बेहद ही गुस्से में नजर आ रहे हैं।

उन्होंने आज ही भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को लिखे पत्र में राजकुमार ने कहा कि पार्टी द्वारा टिकट ना देने के कारण दुःखी हूँ जिसके कारण पार्टी से इस्तीफ़ा दे रहा हूँ। बहरहाल चुनाव के अंतिम दिनों तक इस तरह के राजनीतिक खेल सामने आते रहेंगे। परंतु देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनाव में किस पार्टी का पलड़ा ज्यादा भारी है।

 

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