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पम्पी जैन के घर IT की छापेमारी में करोड़ो रूपये की अघोषित लेन-देन का मामला आया सामने

पुष्पराज के ठिकानों पर हुए छापेमारी की तफसील (विस्तृत विवरण ) विभाग ने जारी कर दी है। छापेमारी के बाद विभाग की ओर से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।

By Ujjawal Mishra 
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IT Raid In UP : समाजवादी पार्टी के एमएलसी और अखिलेश यादव के करीबी माने जानें वाले पुष्पराज जैन उर्फ पम्पी जैन की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। आयकर विभाग की टीम ने पुष्पराज के ठिकानों पर हुए छापेमारी की तफसील विभाग ने जारी कर दी है। छापेमारी के बाद विभाग की ओर से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।

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आयकर विभाग के मुताबिक पम्पी जैन ने कई शेल कंपनियां बना रखी थीं। ऐसे में इन कंपनियों के निदेशकों में से एक निदेशक ने आयकर विभाग को एक शपथपत्र पर यह जानकारी दी है कि वह कंपनी में मात्र एक डमी निदेशक के तौर पर काम कर रहा था। उससे कंपनी समूह के प्रमोटर जो कहते थे वह उसी के अनुसार कंपनी के शेयर को पूंजी में निवेश करता था।

पम्पी जैन और मलिक ग्रुप के बीच हुआ था 120 करोड़ रुपए का लेनदेन 

इसके अलावा आयकर विभाग ने यह भी खुलासा किया है कि, 2021 में समाजवादी इत्र बनाने वाले पम्पी जैन और कन्नौज के सबसे बड़े इत्र कारोबारी फौजान मलिक के बीच करीब 120 करोड़ रुपए का अघोषित लेन देन हुआ था। इसमें कैश के अलावा विदेशों से आए रकम का भी खुलासा आयकर विभाग ने किया है। आयकर विभाग को इसमें करीब 100 करोड़ की टैक्स चोरी के सबूत पम्पी जैन के पास से मिले हैं वहीं मलिक ग्रुप से विभाग को 22 करोड़ रुपए की अघोषित आय का सबूत मिला है।

आयकर आयुक्त सुरभि अहलूवालिया ने दी विस्तृत जानकारी

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बता दें कि इस मामले में केंद्रीय प्रत्यक्ष बोर्ड कर बोर्ड यानी CBDT की प्रवक्ता और आयकर आयुक्त सुरभि अहलूवालिया ने विस्तृत जानकारी दी है। छापेमारी में आयकर विभाग की टीम को यह भी जानकारी हाथ लगी है कि, संयुक्त अरब अमीरात के ऑफशोर संस्थानों में से एक ने अवैध रूप से शेयर होल्डिंग ली है। इस समूह की एक भारतीय इकाई में करीब 16 करोड़ से ज्यादा का लेन देन कई गुना ज्यादा प्रीमियम पर किया गया है।

ज्यादातर निवेश रियल एस्टेट में किया जा रहा था

पम्पी जैन के कन्नौज, कानपुर, मुंबई स्थित ठिकानों में आयकर विभाग की तलाशी में पता चला कि इनकी इत्र कंपनी स्टॉक हेर फेर में भी लिप्त है। जानकारी के अनुसार मुनाफे से टैक्स के दायरे में आने वाली इकाई को टैक्स छूट वाली इकाई में ट्रांसफर किया जा रहा था।

आयकर विभाग के मुताबिक कच्चे बिल और बोगस फर्मों की आड़ में हुई कमाई का ज्यादातर निवेश रियल एस्टेट में किया जा रहा था। इसके अलावा जानकारी यह भी मिल रही है कि संयुक्त अरब अमीरात के ऑफशोर में यह दो विला के मालिक भी हैं।

मलिक ग्रुप के कारोबार में भी बड़ा हेरफेर 

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यानी कि बड़े स्तर पर टैक्स चोरी का मामला लंबे समय से खेला जा रहा था। पम्पी के अलावा कन्नौज के सबसे बड़े इत्र कारोबारी मलिक ग्रुप से भी हुई तलाशी में विभाग ने 10 करोड़ रुपए जब्त किए हैं। इसके अलावा यह जानकारी हाथ लगी कि, इनकी कंपनी अपनी सूची के लिए कोई स्टॉक रजिस्टर नहीं रखता। 10 करोड़ कैश के साथ साथ 9.40 करोड़ रुपए से अधिक के आभूषण भी आयकर विभाग की टीम ने सीज किए हैं।

 

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